Wednesday, November 23, 2011

For Mr. Rajendra Kunwar Fariyadi - Teen Pati - 24/11/2011

प्रथम गुरु सनमान माँ,
दूजो है परिवार ! 
तीजो दे मति, सत सदा, 
शिक्षक पालनहार !!  सुर्यदीप अंकित त्रिपाठी - २४/११/२०११ 

for Ms. Mamta Joshi - (Teen Paati) 23/11/2011

तेरी आँखों से छलकती है जो,
मय वो मयस्सर कब होगी...
खाली पैमाना लिए बैठे हैं..
दर पे तेरे कब से ओ साकी....! :) गुस्ताखी माफ़

For Mr. Pratibimb ji... (TEEN PAATI)... 23/11/2011


प्रतिबिम्ब जी, जब श्रीराम लखन और सीता जी, रावन संहार करके अयोध्या लौटते हैं तो..
मुदित मोहित, सर्व जन लख,
सिय-राम लखन पधारते, 
दीप प्रज्जल रहत घर-घर,
प्रभु गर्व पर्व निहारते  !!! सुर्यदीप अंकित त्रिपाठी - २३/११/२०११  

Tuesday, November 15, 2011

for Mr. Maya Mrig - Purani Yaden...16/11/2011


वक्त के बंद पिटारे में, एक बात पुरानी है अब भी जिंदा, 
ख़त के पुर्जों में, बिखरी वो कहानी है अब भी जिंदा, 
अपने अश्कों की नमीं, जो लफ़्ज़ों से की थी तूने बयाँ,
बीच कागज़ के छिपे फूल में वो नमीं है अब भी जिंदा,
सुर्यदीप - १६/११/२०११ 

for Mr. Sanjay Kaushik Kaushik......
कागज़ के फूल कभी खुशबु नहीं देते...सिर्फ एक एहसास देते हैं...वो भी पल दो पल का...
लेकिन...वो ख़त के बिखरे पुर्जे...वो आंसुओं से भीगे हुए ख़त....हमेशा जिंदा रखते हैं इन अहसासों को...

Friday, November 11, 2011

For Ms. Nutan Gairola - Man ka Antardwand..... 12/11/2011

मन का अपनापन, मन ना समझे,
कभी चुप बैठे, कभी शोर करे !!
रहे चित्त सदा समाधी मैं,
पर मन की उलझन कहाँ ठौर करे !!

अंतर्दृन्द की यही परिभाषा है... मन चाहे तो भी वो एक जगह चुप नहीं बैठ सकता, उसे किसी ना किसी कारण से अपना मौन तोड़ के शब्दों के सहारे अपनी अभिव्यक्ति देनी ही होती है...यद्यपि मन का स्वभाव एक योग की तरह होता है, जो उसे प्रिय भी है..लेकिन सांसारिक विपदाएं, बाधाएं उसे मौन नहीं रहने देती और अपने मन की शांति और सुकून और योग को बनाये रखने की लिए उसे बाहरी उलझनों, कलहों, अशांतियों को दबाने के लिए, शांति स्थापित करने के लिए...मौन व्रत तोडना ही होता है.... "शुभ" सुर्यदीप

Monday, November 7, 2011

for Ms. Renu Mehra ..... 08/11/2011

डूब के तन्हाईयों में, जो बसर हो जाएगी,
याद है तेरी, उम्र नहीं, जो गुजर जाएगी !!
माना इक तू ही नहीं, पर प्यार तेरा नस-नस में,
याद के फूल जब भी खिले, तन्हाईयाँ निखर जाएगी !!

"सुर्यदीप" ०८/११/२०११

For Mr. Pratibimb ji - jeevan ki sahajta aur samjhaute... 8/11/2011

सहजता ही सरलता और सुगमता लाती है. जहाँ तक हो सके सहज रहें...जिंदगी में सुगमता रहेगी.
समझौता जीवन का इक ऐसा पहलु है जिसे आप अनदेखा नहीं कर सकते, ये किसी बीमारी के उपचार के लिए लगाया गया वो मलहम है, जिसे लोग अपना स्पर्श देकर बाहरी शरीर पर लगाते हैं पर इसका असर भीतर तक होता है. कई लोग मलहम की जगह गोलियों (tablets) का प्रयोग करते हैं, जिसे निगलना होता है..यहाँ उनकी मजबूरी होती है... पर असर वो भी करती हैं. अतः समझोते जिंदगी से जुडी ऐसी सच्ची कहानियां होती हैं, जिन्हें हमें सुनना होता है, समझना होता है और उस पर अमल भी करना होता है.
आपके सामने सच बोल सकें, चाहे वो आपके लिए अच्छा हो या बुरा, ऐसे ही मित्र वास्तविक मित्र होते हैं. पीठ पीछे की गयी प्रसंसा या बुराई केवल भ्रम ही है जिसका अस्तित्व गौण होता है. क्योंकि पीठ पीछे की गई बातें (अच्छी या बुरी) आपके पास आते-आते अपना रंग, रूप, स्वाद और महत्त्व खो देती है. 
लेकिन इंसान कभी भी इक सा नहीं रहता, परिवर्तन उसके लिए जरूरी है, चाहे वो शारीरिक हो या वैचारिक, शरीर पर तो उसका बस नहीं, लेकिन विचारों में फेर बदल करते हुए इंसान अपने आपको समय के अनुरूप ढाल सकता है. अब विचार अच्छे हैं या बुरे, किसे उसे ग्रहण करना है किसका उसे त्याग करना है, इसका निर्णय उस इंसान का विवेक और बुद्धि पर निर्भर होता है. इसीलिए हमें आज के वातावरण में ऐसे बिरले इंसान कम ही मिलते हैं जो हमेशा अपने कुछ चंद उसूलों या निर्णयों के लिए ही जिया करते हैं.